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Battle Of Bahraich | बहराइच की लड़ाई
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Battle Of Bahraich | बहराइच की लड़ाई

By on July 10, 2018

Battle Of Bahraich | बहराइच की लड़ाई

 

आप में से शायद बहुत कम लोग होंगे जिन्होंने इस युद्ध के बारे में सुना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे भारतीय इतिहास में आक्रमणकारियों के खिलाफ जीते गए युद्धों के बारे में बहुत कम जानकारियां दी गयी है। महमूद गजनी ने अपने भतीजे सलार मसूद के साथ मिलकर भारत के पर कई बार हमला किया था। महमूद गजनी ने सत्तारूढ़ भारत पर कभी भी कब्जा करने की योजना नहीं बनाई। स्थानीय राजा जब तक एक साथ मिलकर उसका सामना करते उससे पहले ही वो संपत्ति को लूटकर वहां से चला जाता था। महमूद गज़नवी के निधन के बाद, मसूद ने 1031 में 100,000  मजबूत सेना के साथ भारत पर आक्रमण कर दिया था। लेकिन वह महमूद ग़जनी की तरह भारत को सिर्फ लूटना नहीं चाहता था।  इसके विपरीत वो भारत पर शासन करना चाहता था। वह बहराइच (वर्तमान उत्तर प्रदेश का शहर) पर कब्जा करने में सफल रहा। इसी जगह से उसने इस्लाम के आगे आत्मसमर्पण और उसे अपनाने के लिए पड़ोसी हिंदू राजाओं को संदेश भेजे। सभी हिन्दू राजाओं ने जवाब दिया कि वह अपनी भूमि और धर्म के साथ अन्याय नहीं होने देंगे और साथ ही मसूद को सलाह दी कि वो शांतिपूर्वक यहाँ से चला जाये। लेकिन मसूद ने भारत छोड़ने से साफ इंकार कर दिया था। सत्रह राजाओं के समूह ने मिलकर फैसला किया की वो मसूद के खिलाफ युद्ध करेंगे और शतरंज प्रतियोगिता के आधार पर उनमे से एक को नेता चुना गया। और राजा सुहेलदेव को नेता के रूप में चुना गया। मसूद के शिविर पर 1033 में राजा सुहेलदेव के नेतृत्व में लगभग 130,000 सैनिकों ने हमला किया और मसूद की सेना को पूरी तरह से तबाह कर दिया। महमूद गजनी ने अपने सभी सैनिकों को मार डाला जिन्होंने भारतीय राजाओं के आगे आत्मसमर्पण किया था। और यहाँ तक की पूरे कस्बों, गांवों को अपना गुलाम बना लिया था। मसूद की पूरी सेना ने भारतीय राजाओं के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था। और सभी कस्बों, गांवों को भी आज़ाद करवा दिया था। इस युद्ध की जीत के बाद भारत पर अगले 160 वर्षों तक किसी ने हमला नहीं किया।

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