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Betrayal In The Battle Of Plassey | प्लासी की लड़ाई में विश्वासघात
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Betrayal In The Battle Of Plassey | प्लासी की लड़ाई में विश्वासघात

By on June 21, 2018

Betrayal In The Battle Of Plassey | प्लासी की लड़ाई में विश्वासघात

 

प्लासी की लड़ाई के बाद ही भारत में कंपनी के शासन की शुरुआत हुई थी। जून 1757 को नवाब सिराज उद-दौला और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच प्लासी का युद्ध हुआ,  इस युद्ध में, अंग्रेजों ने नवाब सिराज उद-दौला को हराया था। यह तो सभी जानते है की अंग्रेजों ने छल का सहारा लेकर इस युद्ध पर अपनी जीत हासिल की थी, अंग्रेजों ने दुरलाभ सिंह और मीर जाफर को अपने साथ यह कहकर मिला लिया की अगर वह नवाब को हराने में हमारी सहायता करेंगे तो बंगाल का सिंहासन उन्हें तोहफे में दिया जायेगा। सिराज उद-दौला ने युद्ध के मैदान में अंग्रेजों को कड़ी टककर दी थी। वह जवान, निडर, और हिम्मतवाले थे और यहाँ तक की उनके पास अंग्रेजों से भी बड़ी सेना थी। लेकिन बदकिस्मती से सिराज उद-दौला के जनरलों ने उनसे कहा की आप महल वापिस लौट जाये और जल्द ही आपके महल में अंग्रेजों की हार की खबर पहुंच जाएगी। नवाब ने अपने जनरलों की बात मान ली और वह युद्ध के मैदान से दूर अपने महल लौट गए थे। इस दौरान नवाब की गैर मौजूदगी का फायदा उठाते हुए जनरलों ने सैनिकों को भयभीत कर दिया, ताकि अंग्रेजों को वसूली में मदद मिल सके और अंतः बंगाल सेना का अंग्रेजी सेना में विलय हो गया।  उस समय मुर्शिदाबाद, बंगाल की राजधानी हुआ करती थी जिस पर अंग्रेजों ने कब्ज़ा कर लिया था।  सिराज उद-दौला ने भागने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा और अंग्रेजों द्वारा उनकी हत्या कर दी गयी। इस लड़ाई के बाद अंग्रेज पूर्वी भारत के सबसे शक्ति राज्य के रूप में उभरने लगे।

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