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Four Major Purusharthas Of Human Life – Dharma, Artha, Kama And Moksha| मानव जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

By on March 11, 2018

Four Major Purusharthas Of Human Life - Dharma, Artha, Kama And Moksha| मानव जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

 

यह कहना गलत नहीं होगा कि मनुष्य के जीवन के ४ प्रमुख लक्षय और उद्देश्यं है। जिनके नाम इस प्रकार है :-  धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। जिन्हें हम पुरुषार्थ भी कहते है।

धर्म (नैतिकता, सदाचार) :- हिन्दू धर्म में मनुष्य के जीवन में उसके धर्म को उसका सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है। इस धरती पर जन्मे हर व्यक्ति को कुछ ऐसे काम करने होते है। जिसके लिए उसका जन्म हुआ होता है। आत्मा अपने आप को भौतिक शरीर में रखती है।  ताकि मनुष्य को उसके लक्ष्य तक पहुंचाया जा सके। कई बार अपने धर्म को पूरा करने के लिए मनुष्य को अपने शरीर, परिवार और नियमों की परवाह किये बिना उसे पूरा करना पड़ता है। धर्म को व्यक्ति के वास्तविक कर्तव्य के रूप में भी समझा जा सकता है। यही मनुष्य का परम उद्देश्य है। जिसके लिए लिए वो पैदा हुआ है। उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति का धर्म उसकी पारिवारिक या व्यावसायिक भूमिकाएं हो सकती है। जैसे कि डॉक्टर, इंजीनियर, अभिनेता, साइंटिस्ट खिलाड़ी इत्यादि। कभी कभी व्यक्ति का धर्म उनके जन्म के साथ ही निर्धारित होता है। एक मनुष्य का धर्म कई चरणों में बंटा हुआ हो सकता है। अपने जीवन में प्रगति के माध्यम से उसे विभिन्न धर्मों या उद्देश्यों की पूर्ति करने का मौका मिलता है। जैसे पहले माता-पिता अपने बच्चे का पालन-पोषण करते है। बाद में बुढ़ापे में उस बच्चे का ये धर्म है की वो अपने माता पिता की सेवा करे जैसे बचपन में उन्होंने की थी। इस प्रकार उस व्यक्ति को पति, पिता और बेटे समेत इन सभी धर्मों का एक साथ पालन करने का सौभग्य मिलता है।

अर्थ (लक्ष्य, महत्व) :- अर्थ भौतिक सम्पत्ति का एक रूप है। जिसकी वजह से व्यक्ति भौतिक सुखों का अनुभव करता है। आध्यात्मिक विकास और भौतिक धन की खोज का मार्ग आगे चलकर एक साथ मिलता है। अध्यात्म की तलाश में निकले साधक को सांसारिक सुख सुविधाओं से मुंह मोड़ना ही पड़ता है। लेकिन यह पूरी तरह से सत्य नहीं है। यदि आप ब्रह्माण्ड को देखे तो प्रकृति में सब कुछ सम्पूर्ण मात्रा में उपलब्ध है। गरीबी कुछ नहीं है, केवल हमारे अंतर्मन से जन्मी एक मिथ्या है। यदि गरीबी में लगातार भूख और भोजन की चिंता है, तो वह आध्यात्मिकता कैसे प्राप्त करेगा? ईश्वर के नजदीक पहुँचने के लिए अपनी दैनिक चिंताओं से ध्यान हटाकर अपना सारा ध्यान ईश्वर की ओर लगाना होगा। यह कहना भी गलत नहीं होगा की धन का पीछा करना ईश्वर की खोज से अलग नहीं होता है। क्योंकि धन प्राप्ति भी कभी कभी मनुष्य को दिव्यता की अनुभूति करवाती है। और तब जाकर व्यक्ति अपने वित्तीय उद्देश्यों को प्राप्त करता है। ओर जब ऐसा होता है तो धन के प्रति लगाव अपने आप समाप्त हो जाता है।

कामदेव (खुशी, इच्छा) :- काम का अर्थ होता है विभिन्न इच्छाओं को पूरा करना जैसे की ताकतवर, धनवान, यौन सम्बन्धी इत्यादि। अपने जीवनकाल में सभी इच्छाओं को पूरा करने के लिए काम पुरुषार्थ का समर्थन करता है। यदि व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक लक्ष्य तक पहुंचाना है। तो पहले उसे अपनी सभी इच्छाओं को पूरा करना होगा। इच्छाओं को दबा के रखना मनुष्य के लिए संभव नहीं है। वो दबी हुई इच्छाएं आगे चलकर मनुष्य के जीवन में उथल पुथल मचा सकती है। इसलिए अपनी इच्छाओं से लड़ने से अच्छा है कि हम समय समय पर उनकी पूर्ति करते रहे। यह दिव्यता की ओर बढ़ने का ये एक सक्षम मार्ग है।

मोक्ष (निर्वाण, उद्धार) :- मोक्ष मनुष्य के जीवन का अंतिम गंतव्य होता है। अपनी सभी इच्छाओं पर विजय प्राप्त करने के बाद मनुष्य को स्वयं की प्राप्ति होती है। उसी को मोक्ष कहते है। यह पहुंचने के बाद मनुष्य अपने सर्वोच्च रूप से मिलता है। यहाँ आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है। मोक्ष का अनुभव व्यक्ति के अंतर्मन को ईश्वर से जोड़ देता है। मोक्ष की प्राप्ति के बाद शिव और शक्ति की ऊर्जा का अनुभव व्यक्ति को एक साथ होता है। जैसे की बहुत सारी नदियां अलग अलग मार्ग पर बहती है। लेकिन अंत में वो सब सागर में ही मिल जाती है। ठीक उसी तरह मनुष्य भी अंत में अलग अलग मार्ग से होते हुए अपने गंतव्य यानी मोक्ष की प्राप्ति करता है।

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2 Comments
  1. Reply

    Enigma

    March 13, 2018

    हो सकता है कुछ लोगों ने ऐसा मन बना लिया हो लेकिन मेरे हिसाब से ब्लॉगिंग को छोड़ना बिल्कुल गलत है। इसे छोड़ने का ये कारण जरुर हो सकता है कि इंडिया में बहुत कम earning होती है लेकिन इतनी भी कम नहीं है कि इसे पूरी तरह बंद कर दिया जाये ये आगे चलकर अपना रंग जरुर दिखाएगी।

    • Reply

      Atul Juyal

      March 15, 2018

      मेहनत करते रहो भाई पैसे तो आज नहीं तो कल अपने आप ही बनने लग जायेगे…!

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