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Has There Been Some Change In Ancient And Modern India? | क्या प्राचीन और आधुनिक भारत में कुछ बदलाव आया है?
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Has There Been Some Change In Ancient And Modern India? | क्या प्राचीन और आधुनिक भारत में कुछ बदलाव आया है?

By on March 4, 2018

Has There Been Some Change In Ancient And Modern India? | क्या प्राचीन और आधुनिक भारत में कुछ बदलाव आया है?

 

यदि आपको भारतीय इतिहास के बारे में जानकारी है तो आप निश्चित रूप से भारतीय प्राचीन सभ्यता, विज्ञान और अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में जानते होंगे। तमिल जिसे दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा माना जाता है, उसका जन्म भारत में ही हुआ था। यहाँ तक की संस्कृत को हिंदी और सभी यूरोपीय भाषा की जननी का दर्जा दिया गया है। यह कहना गलत नहीं होगा की भारत ने ही पूरी दुनिया को पढ़ने-लिखने का ज्ञान दिया है। प्राचीन भारत में अनगिनत गणितज्ञ और आविष्कारकों ने जन्म लिया था। जिस समय भारत में वेद लिखे जा रहे थे, उस समय यूरोप और अमेरिका में आदिवासी निवास करते थे। भारत में सबसे पहले व्यापार की शुरुआत हुई थी। व्यापार की वजह से भारत को सोने की चिड़िया का दर्जा मिला था। सम्राट अशोक के राज्यकाल के दौरान भारत की सीमाएं अफ़ग़ानिस्तान तक फैली हुई थी। लेकिन ऐसा क्या कारण था कि इतने अस्त्रों-शास्त्रों के ज्ञान के बावजूद भारत को हजारों सालो तक गुलामी की जंजीरों में जकड़ा रहना पड़ा ? विदेशी आक्रमणकारियों के आगे क्यों भारतीय शूरवीर राजाओं ने अपने घुटने टेक दिए ? 2 महत्वपूर्ण कारण जिसकी वजह से भारत का मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास गुलामी में गुजरा।

भारत में बौद्ध धर्म और जैन धर्म की स्थापना:-

अहिंसा बौद्ध धर्म और जैन धर्म की मूल शिक्षा है। जैन धर्म में अहिंसा को परमो धर्म कहा जाता है। जब सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाया तब उसके बाद उन्होंने युद्ध करना बंद कर दिया था। बौद्ध धर्म अपनाने के बाद सम्राट अशोक ने अहिंसा का खूब प्रचार किया। सम्राट अशोक ने तो जंगल में शिकार खेलने पर भी रोक लगा दी थी। युद्ध ना करने के कारण सैनिक धीरे-धीरे अपनी सैन्य कला भूलते गए। धीरे-धीरे प्रजा भी अहिंसक हो गयी और अब वो आसानी से किसी भी आक्रमणकारी का शिकार बन सकती थी। यह कहना गलत नहीं होगा की अहिंसा भी एक घातक हथियार है लेकिन इसका इस्तेमाल हर हालात में नहीं किया जा सकता। मोहम्मद बिन कासिम ने सिर्फ ३००० सैनिकों के साथ अफगानिस्तान और सिंध पर कब्जा कर उसे अपना गुलाम बना लिया था। क्योंकि वहां पर बौद्ध धर्म के अधिक लोग थे। उन लोगों के लिए अहिंसा उनका सबसे बड़ा हथियार थी। इसलिए उन्होंने बिना संघर्ष किये हार मान ली। जबकि मोहम्मद बिन कासिम की छोटी सी सेना को हराना कोई मुश्किल काम नहीं था। बाद में महमूद गजनवी और मुहम्मद गोरी ने अफ़ग़ानिस्तान में बौद्ध धर्म का सर्वनाश कर दिया। और आज की तिथि में अफ़ग़ानिस्तान से बौद्ध धर्म पूरी तरह समाप्त हो चूका है। ठीक इसी तरह से जैन धर्म का भी सर्वनाश हो गया। इस दोनों धर्मों को सनातन धर्म की शाखा माना जाता है। इसलिए उनकी शिक्षाओं का प्रभाव हिन्दुओं पर पड़ा और उन्होंने अहिंसक प्रवृत्ति अपना ली। और ये ही कारण था कि भारतीय मुगलों का सामना नहीं कर पाए।

सामाजिक भेदभाव:-

मध्यकालिन और प्राचीन भारत में ८०% जनसंख्या वैश्य और शूद्रों की होती थी। लेकिन शिक्षा केवल ब्राह्मणों का अधिकार था। और युद्ध विद्या पर केवल क्षत्रियों का अधिकार था। जबकि क्षत्रियों की संख्या मात्र ५% ही थी। जब भी देश पर विदेशी ताकतों ने  हमला किया तब केवल ५% लोग ही उनका सामना करते थे। और बाकी के ९५% सिर्फ तमाशा देखते थे। नीची जाति के व्यक्तियों को समय-समय पर प्रताड़ित और लज्जित किया जाता था ताकि वो सेना में भर्ती होने के ख्याल को अपने दिमाग से निकाल दे। वहीं दूसरी ओर मंगोल, तुर्क और अफगानों की सेनाओं में ऐसा भेदभाव नहीं था। वाहन प्रतियोगिता के आधार पर व्यक्ति को सेना में नियुक्त किया जाता था। इसलिए वहां युद्ध कौशल का बहुत तेजी से विकास हुआ। समाज में फैली असमानता के कारण क्षत्रिय एक दूसरे के साथ लड़ते थे। भारतीय राजाओं की हार की यही वजह थी। क्यूंकि वो मिलकर एक दूसरे के साथ लुटेरों का सामना करने में सहमत नहीं थे। अंग्रेजों ने भी हिन्दू और मुसलमानों के बीच फूट डालो और शासन करो की नीति को अपनाया। और पूरे २०० सालों तक राज किया। दुःख तो इस बात का है कि आज के समय में भी भारत में भेदभाव को बढ़ावा दिया जा रहा है और इस बात का फायदा भारतीय नेता खूब उठा रहे है।

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