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India Used To Be Quite Open-Minded About Sex And Sexuality | भारत, सेक्स और कामुकता के बारे में काफी खुली विचारधारा वाला देश हुआ करता था
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India Used To Be Quite Open-Minded About Sex And Sexuality | भारत, सेक्स और कामुकता के बारे में काफी खुली विचारधारा वाला देश हुआ करता था

By on June 30, 2018

India Used To Be Quite Open-Minded About Sex And Sexuality | भारत, सेक्स और कामुकता के बारे में काफी खुली विचारधारा वाला देश हुआ करता था

 

एक समय था जब समाज के रूप में भारत, सेक्स और कामुकता के बारे में काफी खुली विचारधारा वाला देश हुआ करता था। यहाँ तक की महाभारत में भी कई बार सेक्स का विश्लेषण देखने को मिलता है। मिसाल के तौर पर, पांडु का श्राप की अगर किसी और औरत के साथ सम्भोग किया तो उसकी मौत हो जाएगी। भारत प्राचीन काल से ही एक रूढ़िवादी समाज रहा है इसलिए उसकी सेक्स के रूप में इस तरह से उपेक्षा करना सही नहीं होगा। यह तो सभी जानते है की कामसूत्र का जन्म भारत में ही हुआ था। यह वो किताब है जिसके अंदर प्यार की कला को दिखाया गया है। यहाँ तक की मध्ययुगीन युग, जैसे कि कोणार्क, खजुराहो आदि हिंदू मंदिरों और गुफाओं पर जाने पर आपको कई नग्न मूर्तियां और लिंग का चित्र देखने को मिलेगा। क्या आप आज के समय में इस तरह के मंदिरों के निर्माण की कल्पना कर सकतें है?  कई ऐतिहासिक सबूतों से पता चला है कि प्राचीन भारत में महिलाएं हमेशा अपने शरीर को पूरी तरह से ढकना जरुरी नहीं समझती थी। प्राचीन मूर्तियों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है की पुरुषों की तरह महिलाएं भी अपने शरीर के निचले हिस्से में कपडे पहनती थी और ऊपरी हिस्सों को केवल गहनों से ढक देती थी। अगर हम संक्षेप में कहें तो यह सही है कि प्राचीन और मध्ययुगीन युग में भारत में लिंग और नग्नता के प्रति लोगों का रूढ़िवादी दृष्टिकोणहुआ करता था। कला में नग्नता के चित्रण से लोगों को कोई आपत्ति नहीं थी। तो ऐसा क्या हुआ की भारत में कला और कामुकता को लेकर इतना बदलाव आ गया। क्या यह बदलाव भारत में मुगलों के आगमन के बाद आये थे? ऐसा लगता है कि मुस्लिम शासकों को अधिकतर क्षेत्र और देश की संपत्ति का विस्तार करने में अधिक रूचि थी। अधिकतर लोग उस समय स्वतंत्र रूप से अपने धर्म और संस्कृति का प्रचार नहीं करना चाहते थे। वास्तव में ब्रिटिश शासन के दौरान ही भारतीय का नजरिया इतना बदल गया था। 20 वीं शताब्दी के मध्य तक हम बहुत रूढ़िवादी थे। ब्रिटेन का औपनिवेशिक युग  सेक्स और नग्नता के दृष्टिकोण के प्रति काफी रूढ़िवादी था। कई सबूतों से ये पता चला है कि जब ब्रिटिश भारत आए, तो वे सेक्स के प्रति भारतीय लोगों के खुले विचारों से काफी चिंतित थे। उन्हें इस बात से उनसे घृणा होती थी की वे भारतीय शिव लिंग की पूजा करते थे। यही वजह थी उन्होंने कोणार्क मंदिर के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया था। मुस्लिम शासकों की तरह ब्रिटिश देश की संपत्ति का विस्तार करने के व्यवहारों को नियंत्रित करना चाहते थे। शायद इसलिए भारतीय समाज में बहुत तेजी से बदलाव आने शुरू हुए।

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