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The Principle Of Democracy Is Came From The Rigveda? | लोकतंत्र का सिद्धांत ऋग्वेद से आया है?
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The Principle Of Democracy Is Came From The Rigveda? | लोकतंत्र का सिद्धांत ऋग्वेद से आया है?

By on June 18, 2018

The Principle Of Democracy Is Came From The Rigveda? | लोकतंत्र का सिद्धांत ऋग्वेद से आया है?

 

लोकतंत्र में लोक का मतलब जनता और तंत्र का मतलब व्यवस्था होता है। जनता का राज्य यानी कि लोकतंत्र।  इस जीवन पद्धति के अंदर स्वतंत्रता, समता और बंधुता समाज-जीवन के मूल सिद्धांत आते हैं।  अंग्रेजी में लोकतंत्र शब्द को डेमोक्रेसी (Democracy) कहा जाता है यह शब्द ग्रीक मूल शब्द ‘डीमोस’ से लिया गया है। डीमोस मतलब ‘जन साधारण’ और क्रेसी का अर्थ है ‘शासन’। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो भारत में लोकतंत्रात्मक शासन प्रणाली का आरंभ पूर्व वैदिक काल में ही हो गया था। प्राचीन काल से ही भारत में एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था का अस्तित्व रहा है। प्राचीन साहित्य, सिक्कों और अभिलेखों से इसका प्रमाण मिलता है। ऐसा कहा जा सकता है कि लोकतंत्र का सिद्धांत वेदों की ही देन हैं। सभा और समिति का उल्लेख हम ऋग्वेद एवं अथर्ववेद दोनों में देख सकतें हैं। इस प्रणाली के अंतर्गत राजा, मंत्री और विद्वानों से विचार विमर्श करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाता था। इससे हमें यह जानने को मिलता है कि उस समय राजनीति कितनी मजबूत हुआ करती थी। हालाँकि उस समय भी विभिन्न विचारधारा के लोग कई दलों में बंटे हुए थे और आपसी सलाह मशवरा करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाता था। तो हम कह सकते है कि वैदिक काल में ही द्वि सदस्यीय संसद की शुरुआत हो चुकी थी। इंद्र देवता का चयन भी वैदिक काल में इन्हीं द्वि सदस्यीय संसद के फैसलों से होता था।  गणतंत्र शब्द का वर्णन ऋग्वेद में 40, अथर्ववेद में 9 और ब्राह्मण ग्रंथों में हजारों बार किया गया है। वैदिक काल के पतन के बादराजतन्त्र प्रणाली की शुरुआत हुई थी जिनका शासन काफी लम्बे समय तक चला था। प्राचीन काल में बहुमत के दम पर ही निर्णय लिए जाते थे और इसी निर्णय प्रणाली को आज की आधुनिक सांसद ने अपनाया है। गणराज्य को प्राचीनकाल में प्रजातांत्रिक प्रणाली के रूप में देखा जाता था। महाभारत के शांति पर्व में `संसद´ नामक एक सभा का उल्लेख भी दिया गया है, जिसमे आम जनता के लोगों की भागीदारी होती थी।  जिसे जन सदन के नाम से भी जाना जाता था। यहाँ तक कि बौद्ध काल के समय में भी उस समय लोकतंत्र व्यवस्था थी। लिच्छवी, वैशाली, मल्ल, और कम्बोज आदि गणतंत्र संघ लोकतांत्रिक व्यवस्था के उत्तम उदाहरण है। वैशाली के प्रथम राजा विशाल का चयन चुनाव द्वारा ही हुआ था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में गणराज्य का 2 अलग-अलग तरह से वर्णन किया गया है, पहला अयुध्य गणराज्य जिसमे केवल राजा ही फैसले लेता था। और दूसरा श्रेणी गणराज्य जिसमें हर किसी की भागीदारी होती थी। पाणिनी की अष्टाध्यायी में भी हमें जनपद शब्द का उल्लेख देखने को मिलता है।  जिसमें जनता अपना प्रतिनिधि चुनती थी और फिर वह व्यक्ति शासन व्यवस्था संभालता था।

इस लेख से हमें यह पता चलता है कि प्राचीन काल से ही कई स्थानों पर गणतंत्रीय व्यवस्था रही थी।  अर्थात यह कहना गलत नहीं होगा कि लोकतंत्र का सिद्धांत रिग्वेदा की ही देन है।

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1 Comment
  1. Reply

    GermanaHair

    June 19, 2018

    Thanks! And thanks for sharing your great posts every week!

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