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The Story Of Shachi Goddess | शची देवी की कहानी
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The Story Of Shachi Goddess | शची देवी की कहानी

By on April 16, 2018

The Story Of Shachi Goddess | शची देवी की कहानी

 

हम सभी जानते हैं कि द्रौपदी महाभारत का एक महत्वपूर्ण पात्र थी। सौंदर्य और बुद्धि का अद्भुत संगम। बहुत से लोग मानते हैं कि वह शची देवी का अवतार थी। आज हम इंद्राणी/अनंद्री/पौलोमी/शची से संबंधित दिलचस्प कहानी के बारे में चर्चा करेंगे। ऋषि दधीचि के बलिदान के बाद,  इंद्र देव ने एक लंबी तपस्या शुरू कर दी थी। कई सालों तक उन्होंने कमल के फूल पर बैठकर ध्यान लगाया। इंद्र की अनुपस्थिति में, शची ने स्वर्ग का प्रभार संभाला, लेकिन अब देवताओं को एक राजा की आवश्यकता थी। देवताओं ने नहुष को अपने राजा के रूप में चुनने का फैसला किया। नहुष ने स्वर्ग पर लंबे समय तक और अच्छी तरह से शासन किया। लेकिन बाद में उसे गर्व के नाग ने काट लिया था। जिसके कारण वह अभिमानी हो जाता है और स्वर्ग के अन्य देवताओं का अपमान करना शुरू कर देता है। इस बीच, वह शची की खूबसूरती देखकर मदहोश हो जाता है और उसे शादी करने के लिए मजबूर करता है। कुछ समय बाद शची महल छोड़ देती है, और बृहस्पति के साथ रहने लगती है। दूसरी और बृहस्पति भी नहुष के शासन को तोड़ने की योजना बना रहा होता है। बृहस्पति शची को बताता है कि केवल वो उसे अपने महल से बाहर ला सकती है। शची एक योजना बनाती है और वापस महल लौट जाती है। अहंकारी और शराबी नहुष उससे मिलने के लिए दौड़ता है। शची मुस्कुराते हुए कहती है कि यदि आप मुझसे शादी करना चाहते हैं तो आपको एक दूल्हे के रूप में आना होगा। आपको प्रसिद्ध ऋषियों के कंधों पर बने सिंहासन पर बैठना होगा। नहुष शची की इस शर्त को मान लेता है, और चार ऋषियों के कन्धों पर रखी पालकी में सवार हो जाता है। यद्यपि चार ऋषियों में एक बौना था, जिसके कारण पालकी की गति धीमा हो रही थी। यह देख क्रोधित नहुष ने ऋषि को लात मारी और चिल्लाया, “तेजी से चलाओ”। अपमानित ऋषि ने नहुष को शाप दिया कि आप एक सांप बन जाएंगे। और इस तरह काम पूरा हो गया और युद्ध के बिना, शची को नहुष से मुक्ति मिल गयी।

 

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