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The Story Of Surdas And His Guru | सूरदास और उनके गुरु की कहानी
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The Story Of Surdas And His Guru | सूरदास और उनके गुरु की कहानी

By on April 4, 2018

The Story Of Surdas And His Guru | सूरदास और उनके गुरु की कहानी

 

सूरदास पढ़ाई के प्रति काफी समर्पित थे और उनकी आध्यात्मिकता के विषय में काफी रुचि थी। जल्द ही उनके जीवन में उनके गुरु का आगमन हुआ। उनके गुरु को अहसास हुआ की सूरदास को बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था। और इस गुस्से का उसके सीखने की गुणवत्ता पर बहुत प्रभाव पड़ा। गुरु ने तय किया कि वह सुरदास को अपने गुस्से पर नियंत्रित करना सिखाएंगे। गुरु ने सूरदास को बताया कि वह अपने सभी कामों के साथ-साथ हर रोज भगवान के नाम का जाप करे और एक महीने के बाद मुझसे आकर मिले। सूरदास ने अपने गुरु के आदेश का पालन किया और फिर एक महीने बाद वह अपने गुरु से मिलने आया। जब वह गुरु के आश्रम की ओर जा रहा था तब एक सफाई कर्मचारी ने गलती से उसके कपड़ों पर कूड़ा गिरा दिया। ये देख सूरदास को बहुत गुस्सा आया और उसने सफाई कर्मचारी को काफी फटकार लगायी। वह वापिस घर गया वहां उसने कपड़े बदले और फिर गुरु के आश्रम की ओर चला गया। जैसे ही वह आश्रम पहुंचा, गुरु ने सूरदास को बताया की वह अभी शिक्षा ग्रहण  करने योग्य नहीं हुआ है। गुरु ने फिर से उसे एक महीने के लिए भगवान के नाम का जाप करने का आदेश दिया। दुखी सूरदास वापस लौट आया और उसने फिर से काम करते करते भगवान के नाम का जाप करना शुरू कर दिया। एक महीने के बाद वह बड़ी उत्सुकता के साथ अपने गुरु के आश्रम की और चल पड़ा लेकिन फिर से सफाई कर्मचारी ने उसके ऊपर कूड़ा गिरा दिया। यह देखकर, सूरदास फिर गुस्सा हो गया। सूरदास अपने घर लौट आया, स्नान किया और नए कपड़े पहने और अपने गुरु से मिलने चला गया। लेकिन गुरु ने फिर से सूरदास को एक महीने के लिए भगवन के नाम का जाप करने का आदेश दिया। एक महीने के बाद, सूरदास अपने गुरु से मिलने गया और फिर से वो ही घटना दोबारा हुई। हालांकि इस बार सूरदास ने धीमी आवाज़ में धन्यवाद कहा और कहा कि आप मेरे गुरु हैं और आपने मुझे मेरे गुस्से से छुटकारा दिलाया है। इस बार सफाई कर्मचारी को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन इस बार जब सूरदास गुरु के आश्रम की और बड़ा तो उसने देखा की उसके गुरुदेव स्वयं उसके स्वागत के लिए बाहर खड़े थे। गुरुदेव ने सूरदास को बताया कि वह अब सीखने के लिए तैयार हैं। सूरदास अब पूरी प्रक्रिया को समझने में सक्षम था। गुरु हमेशा जानता है कि उसके शिष्य के लिए क्या सही है। इसलिए, एक शिष्य के रूप में हमें अपने गुरु पर विश्वास करना चाहिए और उनके आदेशों का पालन करना चाहिए।

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