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The Wonderful Truths And Facts About India And Its Scientists |भारत और उसके वैज्ञानिकों के बारे में अद्भुत सत्य और तथ्य

By on March 9, 2018

The Wonderful Truths And Facts About India And Its Scientists |भारत और उसके वैज्ञानिकों के बारे में अद्भुत सत्य और तथ्य

 

आज का ये टॉपिक सभी भारतवासियों को समर्पित है। जैसा की आप सभी जानते है की भारत एक उभरता हुआ देश है। दुनिया भर के देशों के लोग अब हमें इज्जत भरी नजरों से देखते है। यहाँ तक की बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियां आज भारत में निवेश करना चाहती है। तो आखिर भारत की इस लोकप्रियता का क्या कारण है? शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी की भारत हमेशा से ही ऐसा था। लेकिन ये बदलाव हाल-फिलहाल में लोगों की नजरों में आये है। आज हम भारत की उपलब्धियों और आविष्कार के बारे में बात करेंगे। शायद आप में से कुछ लोग ये नहीं जानते कि कैलेंडर का आविष्कार भारत में किया गया था। पूरे विश्व में पहला कैलेंडर भारत में बनाया गया था। और कुछ वर्षों के बाद अंग्रेजों ने अपना कैलेंडर बनाया। अंग्रेजी कैलेंडर के सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर महीनों के नाम हमारे कैलेंडर से चुराए गए थे। हमारे हिंदी कैलेंडर में इन्हे सप्तम्बर, अष्टम्बर, नवम्बर, दसम्बर कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हमारा नया साल मार्च से शुरू होता है। और इसके हिसाब से सातवां, आठवां, नौवां और दसवां महीना सप्तम्बर, अष्टम्बर, नवम्बर, दसम्बर है। अगर आप पंचांग कैलेंडर को देखते है तो उसमे आपको अभी का साल 2074 देखने को मिलेगा। और मार्च के अंत तक, वर्ष 2075 शुरू हो जाएगा। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा की हिंदी कैलेंडर पहले बना था। क्या आप जानते हैं सूर्य पर प्रयोग के दौरान सबसे पहले नासा के वैज्ञानिकों को “ॐ” की ध्वनि सुनाई दी थी। जिस ॐ का उच्चारण हम सदियों से करते आ रहे है,  उसका पता नासा ने अब लगाया है। अब आप लोग सोच रहे होंगे कि सूर्य की आवाज कैसे हो सकती है। जैसा कि हम जानते हैं कि कंपन के कारण आवाज़  उत्पन्न होती है। जैसे ही नासा ने अपना यंत्र सूर्य की ओर किया तो उस यंत्र ने जो कंपन डिटेक्ट किया वो काफी हद तक ॐ जैसी आवाज़ थी। नासा के पास ऐसी ही एक परियोजना थी जिसमें उन्होंने पृथ्वी से सूरज तक की दूरी की खोज की थी। जैसा कि हम जानते है की सदियों से पढ़ी जा रही हनुमान चालीसा में पहले ही सूर्य तक की दूरी का वर्णन किया गया है। यह पंक्ति हनुमान चालीसा की है।

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।

जुग सहस्र जोजन अर्थात सूर्य तक की दूरी।

1 जुग = 12,000 साल

1 सहस्र = 1000

1 जोजन = 8 मील

जुग x सहस्र x जोजन = 12000 x 1000 x 8 मील = 9,60,00000 मील

1 मील = 1.6 किलोमीटर

9, 60, 00,000 मील x 1.6 किलोमीटर = 15, 36, 00,000 किलोमीटर

नासा की गणना के अनुसार = 15,20,93,481 किलोमीटर

अगर हम ध्यान से देखें तो दोनों में कुछ ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है। ये बात आश्चर्यजनक है कि हजारों साल पहले ये बात हनुमान चालीसा में कैसे लिखी हुई थी। भारत विचित्र और विविध परंपराओं से भरा एक देश है। ऐसी एक परंपरा है सूर्य नमस्कार। हम में से ज़्यदातर लोग बहुत सारी पूजाओं को बिना सोचे समझे करते है। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी की साइंटिफिक तरीके को ध्यान में रखकर हमारे पूर्वजों ने हर एक पूजा विधि को बनाया है। जैसे कि सूर्य नमस्कार करते वक्त सूर्य की किरणें पानी से निकलते हुए सीधे हमारे शरीर में जाती है। जल चढ़ाते वक्त मंत्र के उच्चारण से हमारे शरीर में कंपन उत्पन्न होता है। इस कंपन की मदद से सूरज की सारी ऊर्जा हमारे पूरे शरीर में जाती है। ये सूर्य ऊर्जा शरीर के सारे रोगों का अंत कर देती है। यहाँ तक की दुनिया में सबसे पहला ऑपरेशन भारत में ही हुआ था। आयुर्वेद को दुनिया का पहला चिकित्सा उपचार माना जाता है। लेकिन आज हम आयुर्वेद को छोड़कर आधुनिक चिकित्सा उपचार पर पूरी तरह निर्भर हैं। भारत में जन्मे होने के बावजूद आयुर्वेद के सबसे ज्यादा पेटेंट चीन के पास है। दुनिया की पहली सर्जरी महर्षि सुश्रुता संहिता ने की थी, जो एक भारतीय थे। हमारी इतिहास की किताबें महर्षि की सर्जरी तकनीकों से भरी हैं। यह भी कहा जाता है कि भारत में पहला विमान बनाया गया था। ऐसे कई वैज्ञानिक भारत में रह चुकें है। लेकिन हमारी बदकिस्मती है कि हमारे पास उनके द्वारा लिखी गयी किताबें भी नहीं  है। ज़्यदातर किताबें तो नष्ट हो चुकी है। और बाकी बची हुई किताबें संस्कृत में है और ऐसे बहुत कम लोग है जिन्हे संस्कृत पढ़नी लिखनी आती है। उम्मीद करते है एक दिन हम भारतीय अपनी संस्कृति को समझेंगे और पश्चिमी संस्कृति की ओर अपने झुकाव को कम करेंगे।

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