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Contribution Of Vidyaranya In The Rise Of The Vijayanagara Empire | विजयनगर साम्राज्य के उदय में विद्यार्य्य का योगदान

By on June 4, 2018

Contribution Of Vidyaranya In The Rise Of The Vijayanagara Empire | विजयनगर साम्राज्य के उदय में विद्यार्य्य का योगदान

 

हरिहर और बुक्का काकातिया / होयसालास (इतिहासकारों के अनुसार) की सेना में सरदार थे। 14 वीं शताब्दी के आरम्भ में दक्षिण में इस्लाम की विजय के बाद ,उन्हें हिरासत में ले लिया गया, उनका धर्म परिवर्तित किया और वापस भेज दिया। हालांकि, विद्यारण्य नाम के पुजारी ने उन्हें प्रेरित किया, उन्हें हिंदू धर्म में दोबारा परिवर्तित होने में मदद की और दोनों ने मिलकर फैसला किया की अब वह विजयनगर साम्राज्य की स्थापना करेंगे। चूंकि विद्यार्यन एक महान ज्योतिषी थे, इसलिए नींव का पत्थर रखने के लिए उन्होंने एक शुभ मुहूर्त निकाला, ताकि साम्राज्य का वर्चस्व 2000 वर्षों तक टिका रहे। गुरु ने अपने छात्रों से कहा कि वह दूसरी पहाड़ी पर जाकर दिव्य सितारों की स्थिति की जांच करेंगे और शंख बजाकर सूचित करेंगे, ठीक उसी समय छात्रों को नींव के पत्थर को रखना है। कुछ समय बाद, हरिहर और बुक्का को शंख की आवाज सुनाई दी और उन्होंने नींव का पत्थर रख दिया। कुछ मिनटों के बाद, उन्होंने दोबारा एक और आवाज सुनी।बाद में गुरु ने उनसे पूछा कि कौन सी आवाज पर तुम लोगों ने नींव का पत्थर रखा, जिस पर दोनों ने उत्तर दिया पहली आवाज़ पर गुरुदेव। गुरु ने पहली आवाज के समय के अनुसार कुंडली की गणना की और उन्होंने भविष्यवाणी की कि साम्राज्य का अस्तित्व केवल दो सौ वर्षों तक ही रहेगा। और फिर तालिकोटा की लड़ाई के बाद विजयनगर साम्राज्य 1565 में ध्वस्त हो गया।

 

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