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Laws Imposed By The British Government To Curb Indian Revolutionary Activities | भारतीय क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए कानून

By on July 14, 2018

Laws Imposed By The British Government To Curb Indian Revolutionary Activities | भारतीय क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए कानून

 

औपनिवेशिक काल के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारत में बहुत सारे अधिनियम पारित किये थे ताकि औपनिवेशिक सरकार को मजबूत किया जा सके और अदालत की कानून व्यवस्था की मदद से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार स्थापित हो सके। लेकिन ब्रिटिश शासन के मूल औपनिवेशिक सचांलन की वजह से भारतीय लोगों की जीवन प्रणाली पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ा जिसकी वजह से एक शक्तिशाली साम्राज्यवादी आंदोलन का जन्म हुआ। लेकिन जल्द ही  भारत के लोग अपने पारस्परिक मतभेदों को भूलकर अंग्रेजों की शाही नीतियों के खिलाफ एक होने शुरू हो गए।

भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किये गए कानून :-

  • राजद्रोह की रोकथाम के लिए बैठक अधिनियम

इसे राजद्रोह को बढ़ावा देने या सार्वजनिक शांति में रूकावट पैदा करने की सार्वजनिक बैठकों की रोकथाम के लिए लागु किया गया था। यह अधिनियम तब पारित किया गया जब ब्रिटिश सरकार की खुफिया विभागों ने ये आशंका जताई थी की गदर आंदोलन की आढ़ में भारत में राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा दे रहे है।

  • विस्फोटक पदार्थ अधिनियम

इस अधिनियम के तहत “विस्फोटक” बनाने के लिए जो भी सामग्री, उपकरण, मशीन और आदि चीज़ों का इस्तेमाल सब दंडनीय अपराध के तहत गिना जायेगा। और अगर किसी भी व्यक्ति की इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी पायी गयी तो उस पर  इस अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

  • भारतीय आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम

इस अधिनियम के तहत सार्वजनिक शांति के खिलाफ जितने भी संघठन कार्यरत है, उन सभी पर तत्काल मुकदमा और शीघ्र सुनवाई की जाएगी।

  • अख़बार अधिनियम

यह अधिनियम हत्याओं के नाम पर लोगो की भावनाओं को भड़काने वाले समाचार पत्रों की सुर्खियों पर लगाम लगाने के लिए लागु किया गया था।  वास्तव में, इस अधिनियम की आड़ में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार प्रेस की स्वतंत्रता तथा सरकार के खिलाफ कुछ भी लिखने पर प्रतिबन्ध लगा रही थी। इस अधिनियम द्वारा चरमपंथियों को बुरी तरह से दबा दिया गया था।

इस अधिनियम तहत ब्रिटिश सरकार ने सभी प्रकार के प्रकाशनों पर सख्त प्रतिबन्ध लगा दिए थे।

  • भारतीय नियमों के बहु-फैंसी रक्षा

यह प्रथम विश्व युद्ध के दौरान राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने के इरादे से 1915 ईस्वी में भारत के गवर्नर जनरल द्वारा आपातकालीन आपराधिक कानून लागु किया गया था। लाहौर षड्यंत्र परीक्षण के दौरान इस अधिनियम को पहली बार लागू किया गया था। पंजाब में गदर आंदोलन और बंगाल में अनुष्लन समिति का दमन भी इसी अधिनियम की वजह से हुआ था।

  • रौलेट अधिनियम

इस अधिनियम को  भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलनों को कुचलने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस अधिनियम के तहत ब्रिटश सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के सजा सुनाकर जेल में बंद कर सकती थी।  इस कानून के विरोध में देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन किये गए। गांधीजी के नेतृत्व में व्यापक हड़ताल की शुरुआत हुई।

 

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