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Truth Of 572 Small Islands Of Andaman And Nicobar| अण्डमान और निकोबार के 572 छोटे द्वीपों का सत्य
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Truth Of 572 Small Islands Of Andaman And Nicobar| अण्डमान और निकोबार के 572 छोटे द्वीपों का सत्य

By on March 7, 2018

Truth Of 572 Small Islands Of Andaman And Nicobar| अण्डमान और निकोबार के 572 छोटे द्वीपों का सत्य


572 छोटे-बड़े द्वीपों से मिलकर बना है अण्डमान और निकोबार। लेकिन इन 572 द्वीपों में से बहुत कम द्वीपों में लोग रहते है। ये सारे द्वीप अपनी सुंदरता के लिए दुनिया भर में जाने जाते है। इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। लेकिन इस खूबसूरत और छोटे से द्वीप पर एक अंजाना इतिहास भी दफन है। भारत की मुख्य भूमि से लगभग 1200 किलोमीटर दूर स्थित है अंडमान और निकोबार द्वीप। रॉस द्वीप इसी द्वीप का एक हिस्सा है। यह द्वीप पोर्ट ब्लेयर शहर के काफी पास है। 20 वी सदी की शुरुआत में यहाँ ब्रिटिश हुकूमत का मुख्यालय था। अंग्रेजों की प्रथा के अनुसार वो जगह का नाम उसी आदमी के नाम पर रखते थे जिसने उस जगह की खोज की थी। यहाँ पर कई ऐसी इमारतें है जो अपने आप में काफी भव्य है। यहाँ की वास्तुकला को देखने के बाद आपको यहाँ के इतिहास से जुड़ने का एहसास होता है। प्रेस्बिटेरियन चर्च जिसे द्वीप के बिलकुल बीच में बनाया गया था। उस जमाने में यह चर्च काफी विशाल और सुन्दर हुआ करता था। रॉस द्वीप की बेकरी सिर्फ एक ऐसी जगह है जिसकी इमारत पूरी तरह से सलामत है। इस बेकरी में ब्रेड, पेस्ट्री और केक बनाया जाता था। यहाँ बनाये जाने वाले खाद्य पदार्थ केवल अंग्रेजी अधिकारीयों द्वारा खाये जाते थे। एक समय था जब रॉस द्वीप पर अंग्रेज अपने परिवारों के साथ रहा करते थे। उस ज़माने में रॉस द्वीप पर स्विमिंग पूल, चर्च, स्कूल और बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध थी। 1857 में हुए विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने स्वतंत्रता सेनानियों को ऐसी जेलों में रखने का निर्णय लिया था जो भारत से काफी दूर थी। १० मार्च १८५८ को इन कैदियों को अण्डमान लाया गया था। और कुछ कैदी ऐसे थे जिन्हे रॉस जेल में रखा गया था। अंग्रेजों ने अपना संसार बसाने के लिए दुनिया भर से कई आलीशान पत्थर यहाँ रॉस द्वीप पर मंगवाए थे। इसमें कोई शक नहीं कि अंग्रेजों ने यहां बेहद खूबसूरत इमारतों का निर्माण करवाया था। लेकिन एक सत्य यह भी है कि ये निर्माण भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के बिना संभव नहीं होता। यहाँ के कैदियों से अंग्रेज मजदूरी भी करवाया करते थे। इमारतों में लगे पत्थरों को हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने ही तराशा था। 1939 में आये भूकंप की वजह से इस द्वीप का 130 एकड़ का क्षेत्र पानी में डूब गया था। ऐसा कहा जाता है कि इस भूकंप के बाद इस द्वीप के मध्य में एक दरार पड़ गयी थी। ऐसी अफवाह भी फैली की रॉस द्वीप डूबने वाला है जिसकी वजह से कई अंग्रेजों ने यहाँ ने पलायन कर दिया था। कुछ दिनों के बाद द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। इस युद्ध में जापान अंग्रेजों के साम्राज्य को नष्ट करना चाहता था। इस युद्ध में जापान अंग्रेजों के साम्राज्य को नष्ट करना चाहता था। ये ही वजह है कि जब जापानी सेना यहाँ रॉस द्वीप पर पहुंची तो उन्होंने बहुत सारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने जेल में बंद भारतीयों को भी छुड़ाया। भारतीय कैदियों को लगने लगा की अब उन्हें अंग्रेजों से छुटकारा मिल जायेगा। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। बाद में जापानी लोगों का व्यवहार भारतीय लोगों के साथ अंग्रेजों से भी ख़राब था। यहाँ के कई कैदियों पर जासूसी का आरोप लगाते हुए जापानियों ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। और बचे हुए कैदियों को समुद्र में फेंक दिया। अंग्रेजों ने एक बार फिर 1945 में इस द्वीप पर कब्ज़ा किया। और आजादी के बाद अंग्रेजों ने इस द्वीप को भारत सरकार को सौंप दिया। ये कहानी थी अंडमान निकोबार के 572 द्वीपों में से एक रॉस द्वीप की।


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